ब्रम्हा जी की पूजा क्यों नहीं की जाती भारत में जानें कारण

भगवान ब्रह्मा हिंदू विजय के पहले देवता हैं। विजय में तीन देवता शामिल हैं जो दुनिया के निर्माण, रखरखाव और विनाश के लिए जिम्मेदार हैं। भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव की हिंदू त्रिमूर्ति के भीतर, भगवान ब्रह्मा निर्माता, भगवान विष्णु  रक्षक और भगवान शिव संहारक हैं।  

 त्रिदेवों के निर्माता भगवान ब्रह्मा कमल पर विराजमान दिखाई देते हैं। उनके चार सिर और चार हाथ हैं। प्रत्येक हाथ में उनके पास क्रमशः एक यज्ञ उपकरण, वेद, एक जल पात्र और माला है। अधिकांश अन्य हिंदू देवताओं के विपरीत,  उनके पास कोई भी हथियार नहीं है। कहा जाता है कि ब्रह्मा के चार मुख चार वेदों का प्रतिनिधित्व करते हैं। कमल वास्तविकता का प्रतीक है, और उनके सिर भी चार दिशाओ का प्रतिनिधित्व करते हैं।

हिंदू पौराणिक कथाओं में,

जब ब्रह्मा ब्रह्मांड का निर्माण कर रहे थे उन्होंने एक महिला को अपने शरीर से बनाया जिन्हे शतरूपा के रूप में जाना (शाब्दिक रूप से सौ सुंदर रूपों में से एक) गया  । मत्स्य पुराण के अनुसार, शतरूपा को अलग-अलग नामों से जाना जाता था, जिनमें सतरूपा, संध्या या ब्राह्मी,सरस्वती शामिल थे।  शतरूपा इतनी सुंदर थी कि ब्रह्मा उनसे पूरी तरह से प्रभावित हो गए और उनकी सुंदरता के मोह में ब्रह्मा ये भूल गए की ये उन्ही के शरीर से उपजी है तो रिश्ते में ये उनकी बेटी हुई ।जब उन्होंने उनके सौंदर्य को देखा, वह देवी शतरूपा को अपनी पत्नी के रूप में पाने की लालसा में जहां भी देवी गई  उसे घूर कर देख रहे थे । इस व्यहवार से शतरूपा शर्मिंदा हो गई।क्योकि वह ब्रम्हा जी के शरीर से बनी सतरूपा उनकी बेटी जैसी थी।

शतरूपा ब्रह्मा की नजरो से बचने का प्रयास करने हेतु विभिन दिशाओ में जाने लगी परन्तु उनके पास 4 सिर थे जो हर दिशा में देख सकते थे इस इस कारण देवी शतरूपा को ऊपर आकाश की ओर जाना पड़ा इसके साथ ही ऊपर की ओर देखने के लिए ब्रह्मा ने एक और सिर विकसित किया। । इस क्षण में शिव प्रकट हुए जो बहुत क्रोधित थे उनसे ये सब देखा नहीं गया तथा उन्होंने ब्रह्मा का पांचवा सर अपने त्रिशूल से काट कर अलग कर दिए । तथा उन्हें श्राप भी दिए की पृथ्वी पर आने वाले समय में कभी भी ब्रह्मा जी की पूजा नहीं होगी और जैसा की हम सब दुनिया में भगवान शिव तथा विष्णु जी के सबसे अधिक मंदिर है जिसमे जाने वालो भक्तो की संख्या सबसे ज्यादा है जबकि ब्रह्मा जी का केवल एकमात्र मंदिर पुष्कर (राजस्थान) में स्थित है जिसमे ब्रह्मा जी की खंडित प्रतिमा की पूजा होती है ।घटना के बाद से, ब्रह्मा पश्चाताप के प्रयास में चार वेदों का पाठ कर रहे हैं। 

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